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12 जून, 2021
बसेड़ा की डायरी : किसी की छान पर आलड़ी, तरोई या गिलकी लगेंगी।
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बसेड़ा की डायरी, 12 जून 2021 गाँव के पढ़े-लिखे, कम-पढ़े और बिन-पढ़े सभी कहते हैं कि स्कूल में बच्चे नहीं तो फिर माड़साब के लिए क्या काम रहत...
07 जून, 2021
बसेड़ा की डायरी : गर्मियों की छुट्टियाँ बीत गयीं।
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बसेड़ा की डायरी, 7 जून 2021 गर्मियों की छुट्टियाँ बीत गयीं। सबकुछ चुपचाप गुज़र गया। न माड़साब-बहन जी अनुभव कर पाए न शिष्यों को भनक लगी। बड़े...
03 जून, 2021
बसेड़ा की डायरी : निष्कर्ष पर पहूँचने की जल्दी का सत्यानाश हो
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बसेड़ा की डायरी, 3 जून 2021 बबली सहित घर में दो बहनें और एक भाई हैं। बसेड़ा के बीचोंबीच भी एक घर है पर परिवार ने अब बाड़ी के रास्ते मोती मगरी ...
02 जून, 2021
बसेड़ा की डायरी : अध्यापन मिशनरी जिम्मा है।
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बसेड़ा की डायरी, 2 जून 2021 गहन चिंतन में कई बार साफ़ हो चुका है कि अध्यापन मिशनरी जिम्मा है। बच्चों के खेल की भाषा में कहूँ तो इसमें हम...
01 जून, 2021
बसेड़ा की डायरी : देहाती स्कूल में अध्यापकी के अपने सुख और सुविधाएँ हैं।
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बसेड़ा की डायरी, 1 जून 2021 देहाती स्कूल में अध्यापकी के अपने सुख और सुविधाएँ हैं। एक अनुमान कहता है कि न्यूनतम में अधिकतम देने का चैले...
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