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09 मार्च, 2012

09-03-2012

आकाशवाणी जयपुर के निदेशक बी.सी.पंवार चित्तौड़ आए हुए थे.अप्रेल दो हज़ार बारह को सेवा से मुक्ति लेने वाले पंवार साहेब.हमारे योगेश कानवा जी के एक फोन पर हमने उन्हें सम्मानित करने मालाएं पहनाने का निर्णय किया.सत्य नारायण जोशी जी से फड़ पेंटिंग मंगवाई.दो माला मैं लाया,सत्तार मियाँ के कहने से पांच मालाएँ और हमारे साथी दीपेश लाए.साढ़े चार पर बुलाए हमारे केजुअल पांच तक आते रहे.कम लोगों की सख्या होने से चोटी जगह तलाशते  हुए पंवार साहेब को कटारा जी के चेबर में ही अभिनन्दन कर,पूरा सुना.सभी से पूछने पर परिचय देने की रस्म हुई.रजनी और स्नेहा का परिचय रस्म अंदाज़ सभी ने सराहा.

पंवार साहेब ने आज के बच्चों के लालन-पालन पर सुझाव पूछे-ताछे.सभी मास्टर-जात केजुअल ने सुझाव दी भी.कुछ वकील-जात साथियों से भी सवाल-जवाब हुए.ऑफिस के खासमखास राजपूत जी के कैमरे से कुछ फोटो  ही ले पाएं,क्योंकि आनन्-फानन में हुए इस आयोजन के लिए केमरा पूरी तरह चारज किया हुआ नहीं था.फोटो खिंचाई रस्म बाद में योगेश के मोबाईल से पूरी हुई.ख़ास बात ये भी थी कि हमारे अज़ीज़ प्रकाश खत्री हमारे इस मंडली में साथ थे.आमतौर से एकदम भिन्न.

शुक्रवार का दिन होने शाम हुए इस संगतनुमा बैठक में ज्यादातर कर्मचारी अनुपस्थित थे.आज पहली बार लगा कि बड़े से बड़े आदमी के नाम पर भी हम सभी साथी एक आवाज़ पर इकठ्ठे नहीं हो सकते थे.इसके उलट अगर आकाशवाणी ड्यूटी पर बुलाए तो पांच मिनट पहले हाज़िर.क्योंकि शायद वो ड्यूटी उन्हें-540/-या कि फिर  610/- तक दाम दिला जाती थी.पंवार साहेब की नरम रवैये ने मन मोहा.वे चित्तौड़ में इक्यानवे के साल में रहे भी.लेकिन उनके साथ के साथी भी आज नहीं आ सके. बहुत से ऐसे साथी आयोजन में मौजूद थे जो उनके सानिध्य में तो नहीं जुड़े लेकिन सभ्य होने के सवाल पर उपस्थित थे.समोसे के चटकारे लेने और चाय सुडकने के साथ ही ये आयोजन पूरा हुआ.

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