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  1. कठपुतलियों के जरिये प्रकृति की पीड़ा का स्पंदन
  2. स्पिक मैके विरासतः पंद्रहवीं शताब्दी के नृत्य ने मन मोह लिया
  3. बिरहा संगीत को नई ऊंचाई दिया था राम कैलाश यादव ने
  4. ''बिरहा गायन का एक लोकप्रिय स्वर जाता रहा और आहट तक नहीं हुई।''
  5. जानवरों के लिए चैनल है, संगीत के लिए नही- पं.विश्व मोहन भट्ट
  6. सपना साकार, पालिथीन पर रोक
  7. महाराजा ने रची फुटपाथ की कविता
  8. आदिवासियों के लिए साईकिल पर भारत यात्रा पर निकले हिमांशु कुमार
  9. सच्चाई और पीड़ा को सीने से लगाता नंदी
  10. छपाक-छपाक का अर्थात्
  11. वर्ण व्यवस्था ही सब मुश्किलों की झड है.-डॉ. व्यास 
  12. अगर ये दलित नहीं होते तो पूरा गांव सड़ जाता
  13.  मधुमती पत्रिका जुलाई-2013 अंक में दो कवितायेँ 
  14. 'शोध दिशा' के फेसबुक कविता विशेषांक में छपी कवितायेँ
  15. 'उम्मीद' पत्रिका के चौथे अंक में छपी दो कविताएँ
  16. 'यात्रा' पत्रिका के आठवें अंक में दो कवितायेँ
  17. 'परिकथा' पत्रिका के नवलेखन अंक(January-February 2014) में छपी अपनी कविताएँ
  18. 'कृति ओर' के जनवरी-मार्च 2014 अंक में छपी कविता
  19. ''कौशिकी'' पत्रिका में कविताएँ
  20. 'विधान केसरी' के परिशिष्ट में छपी अपुन की एक कविता

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