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14 अप्रैल, 2012

14-04-2012

तारीख से पता लग रहा है कि आज कामरेड भीमराव अम्बेडकर जयन्ती है.उन्हें घर में बैठे हुए कुछ भी पढ़ नहीं पाया.कहीं जाकर उनकी मूर्ती पर मालाएं नहीं पहनाई.फोटो न खिंचवाई न ही कहीं अखबार में छपवाने के लिए छटपटाया.न ही नारे लगाए जिंदाबाद के .लेकिन उनके विचार और काम को समझने के लिहाज़ से अपने जानकार साथियों से आज चर्चा ज़रूर करूंगा..क्या मैं गलत रास्ते पर हूँ?

चित्तौड़ में भाजपा के राजनाथ सिंह आए हुए हैं.लोकतंत्र करके किसी अच्छे विषय पर उनका व्यख्यान होना है.जन चेतना मंच करके आयोजन संस्था है.आयोजन का निमंत्रण सामने वाली दिवार की खूँटी पर लटका है.पढ़ने के बाद दोवड़ा  कर रखे हुए.आकाशवाणी जाना है अगल हफ्ते की ड्यूटी पता लगाने.साथी डॉ.कनक जैन की भीमराव जी पर ही एक वार्ता रिकोर्ड करनी है.आज ही शाम प्रसारित होगी.जाएं तो जाएं कहाँ

कल रविवार है.वो भी ऐसा वैसा रविवार नहीं,पोलियो रविवार है.अमिताभ की आवाज़ की याद दिलाता दो बूँद वाला रविवार.सारे स्कूल सुबह साढ़े सात से शाम पांच बजे तक खोलने के फरमान जारी हो चुके हैं.भले ही स्कूल में पोलियो बूथ हो ही नहीं.फरमान तो फरमान है.नौकरी का सवाल है जाना पडेगा.

पंद्रह तारीख को ही शहर के हमारे गुरुवर डॉ. सत्यनारायण व्यास के द्वारा एक निजी भोज का आयोजन किया जा रहा है.कारण शायद उनके हित षष्टि पूर्ति है.आज सुबह ही फोन मिला.व्यास जी बोले इस पोलियो रविवार की वज़ह से हमारे कई मेहमान भी अटक रह रहे हैं.इधर हाँ आज की छुट्टी देख घर में गृह मंत्रालय की तरफ से कूलर की सफाई करत हुए घास बदलने का फरमान जारी हुआ है.बच्ची के लिए अब तक स्कूल फाईनल नहीं हुआ वो काम भी बाकी कामों की सूचि में अभी भी शामिल ही समझो.गाँव जाना फिर एक बार लटक गया.कामों के अम्बार से हम अटे पड़े हैं.


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