पिताजी का मकान ------------ छूट्टी के बाद का बचपन बीत गया खेतों की मेढ़ पर दिशाहीन हो डोलते फिरने में कहाँ दिन गु...
पिताजी का मकान ------------ छूट्टी के बाद का बचपन बीत गया खेतों की मेढ़ पर दिशाहीन हो डोलते फिरने में कहाँ दिन गु...
(लम्बी कविता)''बदल गया है वक़्त कितना'' नैन बावरे,मन बावरा धड़कन जिसको भजती है रही तलाश में अबतक सालों से नज़र जिसके आता नही...