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01 अगस्त, 2012

31-07-2012

(चित्तौड़ में सालों से युवा कला संस्थान द्वारा आयोजित हो रही रफ़ी नाईट के साल-2012 आयोजन से आते ही)
बुलाये,बिना बुलाये सभी के लिए एक सी कुर्सियां, बहुत पीछे ठन्डे पानी की केने, भीलवाड़ा रोड़ बाई पास पर गुलशन गार्डन के वाटर प्रूफ टेंट में आयोजन। मैं बिना बुलायों की जमात से ताल्लुकात रख रहा था। दरवाज़े पर एक स्वागत बेनर था, स्वागत में पलक पावड़े बिछाए सजीव इंसान नहीं। बाहर की सड़क के दोनों तरफ खड़ी छोटी-बड़ी गाड़ियों से ही रसिकों की संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता था। रात ठीक नौ बजे शुरुआत।अतिथियों में विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत, जिला कलेक्टर रवि जैन और बाकी कुछ दानदाता। जिनके सहयोग के बिना तमाम व्यवस्थाएं पैदा करना थोड़ा मुश्किल काम है। श्रोताओं के लिए फ्री फंट  में उपलब्ध इस आयोजन के दो एंकर बार बार के.के.शर्मा, डॉ. रमेश राव शिंदे और फोटो स्टूडियो वाले सुहालका साहेब को याद कर रहे थे। चित्तौड़ शहर को ऐसे कार्यक्रम उपहार में देने के लिए आयोजकों को बधाई।

बाहर से आयातित एंकर हमेशा बेहतर हों ज़रूरी नहीं। पुरुष एंकर की आवाज़ ने पर्याप्त रूप से आकर्षित किया। अनुशासन में रहते हुए उसका ज़रूरत के मुताबिक़ बोलना भा रहा था। नाम मुझे ध्यान नहीं।शायद उदयपुर से आये थे। उन्हें बधाई।महिला एंकर नाम शायद प्रतिष्ठा ठाकुर था। माफ़ करें बहुत अधिक बोलना,एक श्रृद्धांजली जैसे कार्यक्रम को किसी डांस प्रतियोगिता की तरह आनंदमयी बनाने की उनकी कोशिश मुझे नहीं रूचि। मुझ जैसे आकाशवाणी के आदी श्रोता को उनका उच्चारण दोष बहुत अखरा। दोनों एंकर में तालमेल कम था। धीरे धीरे हॉल तो भर ही गया। लोग घर-ऑफिस के काम निबटते ही यहाँ पहूँचने लगे। वहीं दस बजने के साथ कुछ लोग खिसकने लगे जिन्हें सुबह सात का स्कूल निभाना था या अपने बच्चों को स्कूल की बस पकड़वानी थी।

खैर शुरुआत में अरविंद ढीलीवाल का गीत जमा। एक दो गीत और हुए। बाद में एक बाहर से आये साथी ने बहुत उम्दा गीत गाया। बीच बीच में ज़रूरत से ज्यादा जानकारी देने के चक्कर में जस्ट उसके पहले सुनाये गीत के असर को ख़त्म करने का एंकर का वो गैर ज़रूरी हस्तक्षेप वाला मामला मुझे अच्छा नहीं लगा। पायल और सचिन के दोगाने ने दिल लूट लिया। पायल दाधीच अच्छा गाती है। अच्छे गीत बाद में और भी हुए होंगे मैं घर चला आया। नए गायकों को मंच देने के लिए इस संस्थान को फिर बधाई। मंच पर सभी काले रंग के ड्रेस अप में आये संगीतकारों के नाम मैं नहीं जानता मगर उन्होंने बहुत मेहनत की। काश एंकर उनके नाम भी अतिथियों को दिए सम्मान की तरह ही लेता।

(ये नितांत निजी राय है।इसे एक समालोचना के रूप में आंका जाएगा तो दिल खुश होगा-माणिक )

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