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28 मार्च, 2013

28-03-2013

ऐसा आभास हो रहा है कि अप्रेल में मेरी ऊर्जा सृजन में कम प्रबंधन में ज्यादा खर्च होगी।'अपनी माटी' के आयोजन 'माटी के मीत' के साथ ही आज आयी जानकारी के अनुसार स्पिक मैके के पांच कलाकारों को विद्यार्थियों तक पहुँचाना है। जब भी प्रबंधक की भूमिका में आता हूँ तो औपचारिक होने लगता हूँ। वापसी में फिर जब भी सृजन की तरफ जाने की बारी आती है तो मुझे कुछ दिन तो ध्यान में जाने के लिए ही लग जाते हैं। मतलब सृजन में प्रबंधन से ज्यादा ध्यान की ज़रूरत होती है।मगर हाँ प्रबंधन के लिए मूड बनाने में मुझे तनिक भी वक़्त नहीं लगता है।कभी कभी ऐसा लगता है मुझे फ्री देखते ही बहुत सारे फ्रंट अपनी तरफ बुलाने के इशारे करते दिखते हैं ।जाएँ तो जाएँ कहाँ ?

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