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23 दिसंबर, 2009

बीकानेर से आने के बाद

 
साथियों कैसे हो. सर्दी थोड़ी कम पड़ी है.बीकानेर में सर्दी बहुत ज्यादा है. स्पिक मैके का बीकानेर अधीवसं बहुत ठीक ठाक रहा,बहुत आनंद लिया. अपने दोस्तों से मिलने बातें करने का ठीक मौक़ा मिला.जनवरी में होने वाले कार्यक्रमों की बातचीत के साथ कुछ प्रोग्राम भी देखे.ख़ास बात जो मे सोच कर गया था पूरी नहीं. हुयी मन में एक बात रहा गयी की करणीमाता मंदिर और बीकानेर का किला देखने की इच्छा अधूरी ही रह गयी.अँधेरे में ही किला बाहर से देख पाया. कभी फिर समय निकाल कर जाउंगा.
दूसरी बात मेरे आकाशवाणी में उत्सव समारोह पर भी मेरी पत्नी और बेटी के साथ भाग लिया. वहाँ जफ़र खान सिन्धी जी सुनने का मौक़ा मिला .जफ़र साहेब के साथ की बातें बहुत याद आएगी. बाकी फिर लिखता हूँ. घर जाना है. तीन बार नंदिनी का फ़ोन आ गया है. बेटी को डॉक्टर को दिखाना है. शादी शुदा जिन्दगी के बहुत सारे काम रहते है. ठीक है...... चलता हूँ.

सादर,

माणिक

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