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09 जनवरी, 2010

इनसे मिलने की तमन्ना है......

आज मेरे शहर में सुदेश भोंसले जी आये हुए हैं.टिकट नहीं है मेरे पास ,तो जाना तो नहीं होगा. मेरे कुछ दोस्त वहाँ  जायेंगे. उनसे बात करके काम चला लूंगा.घर में सभी कुछ ठीक ठाक चल रहा है.. कल रविवार है तो पोलियो की  दवाई पिलाने स्कुल जाना है. उन भील जाती के नौ निहालों को दो बूंद ज़िंदगी के पिलाने से देखते है कि उनकी रोज़ मर्रा की जिन्दगी  कैसी  बदलती है,मेरी नौकरी वाले इलाके में तो सभी बच्चे अमिताभ जी वाली ''पा'' फिल्म के औरो लगते है. उनका भविष्य तो वाकई थ्री ईडियट के हीरो  की तरह अँधेरे में ही हैं.कुछ तो वी खुद ही जिम्मेदार है कुछ हम भी.

अच्छा और भी ख़याल ये आ रहा है कि कुछ दिन पहले पंडित रविशंकर जी को सुनाने का मोका  मिला लेकिन मेरी एक बहुत इच्छा अधूरी ही रह गयी कि मुझे एम्.एस. सुबुलक्ष्मी  जी और विदुषी  गंगू बाई हंगल जी को सुनना था.

 खैर वो तो अब संभव नहीं है.फिरभी अभी फिलहाल तो मेरे मन में आबिदा परवीन जी,भीमसेन जोशी जी,पंडित जसराज जी और किशोरी अमोनकर जी से मिलने की ज्यादा इच्छा है.
रेडियो के बहुत लोकप्रिय उद्गोघक भाई युनुश खान जी से भी मिलना हैं. पता नहीं कब मिलना होगा. मगर इच्छाएं पालने ने में तो हर्ज़ ही क्या हो सकता है.

1 comments:

  1. ये तमन्‍ना जरूर पूरी होगी । मैं अगले महीने एक कार्यक्रम में जयपुर आ रहा हूं । शु्क्रिया याद करने के लिए । शुभकामनाएं

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