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12 जनवरी, 2010

थोड़ा सा अपने बारे में

1980 की पैदाइश वाला मैं गरीबी के आसपास वाले बचपने की बस्ती में बड़ा हुआ। अनपढ़ माँ और थोड़े बहुत पढ़े हुए पिताजी का आशीर्वाद छन छनकर मिलता रहा। इकलौती बहिन, बस ऐसे ही परिवार के साथ पूरे रूप में गाँव का आलम मुझे 16 साल की उम्र तक घेरे रहा। मूलतः गंवई, मैं 1995 से तथाकथित शहरी मध्यमवर्गीय बनने की लाइन में अभी तक खड़ा हूँ , यह इन्तजार जरूरी है या गैरजरूरी, मालूम नहीं। एकाध सर्टिफिकेट के बूते हजार रुपये की प्राइवेट नौकरी के तीन सालाना सफर के सामान्तर ले देकर मैंने बीए कर ही लिया। 2005 में इतिहास में एम.ए. पूरा कर 2006 में शादीशुदा होने का गौरव हासिल कर पाया। मेरी पत्नी मेरी 40 वे नम्बर की पसन्द थी।


बचपने में अखबार बेचते-बेचते और स्कूली बालसभा में चुटकुले, गीत-संगीत की रूचि मुझे ठीक-ठाक पाठक बना गई। 2007 में पत्नी की डाँट से की पढ़ाई के बाद, सरकारी मास्टर की नौकरी मिली, 1997 से चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) में रह रहा हूँ, मगर आज भी पानी में तैरना और मोटरसाईकिल चलाना नहीं आता हैं। हाँ, बरसों से पर साईकिल पर पैडल मारने का लम्बा अनुभव है। थोड़े बहुत धुमक्कड़ी स्वभाव और विविध रूचियों के जरिये कई गैरसरकारी संगठनों से अनौपचारिक जुड़ाव रहा है। कलावादी स्वभाव होने से 2001 से स्पिक मैके और 2006 में आकाशवाणी से भी औपचारिक और गहरा जुड़ाव बना हुआ है। 2009 में बी.एड. और बाप बनने की उपलब्धियाँ पाई। डेढ़ से ज्यादा पदम अवार्डी और नामचीन कलागुरुओं से मिलने के बाद उनके साथ हुई बातचीत से बहुत प्रभावित हूँ। कुछ इन्टरनेट तो कुछ अखबारी आलेख पढ़ने के बाद मुझे अब कुछ और भी ऐसे लेखक, गायक, संगीतज्ञ, उद्घोषक से मिलने का मन है जिनसे मैं प्रभावित हूँ। सफर जारी है, थोड़ा बहुत कलम चला लेता हूँ, अभी तो पढ़ना और अच्छा संगीत सुनना सीख रहा हूँ और सफर में आप मिल गए ............................

3 comments:

  1. kya baat hai or kya likhana chahate ho. aapni jivni to puri likha di aap ne.

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  2. मानक जी बहुत अच्चा लगा आप के बारे में पड कर और इसे पड़ने के बाद में आप की और इज्जत करने लगा |

    शेखर कुमावत

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  3. bahut achha lagaa aapako padh kar.main bhi lagaa hoon aapakee tarah bambai men. aapke likhe ko film me utaranaa chaahoonga

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