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24 दिसंबर, 2011

24-12-11

पिछले कुछ दिन से सुबह सात से ग्यारह तक के बिज़ली कट आउट कार्यक्रम में हमारी सुबह बेमन से गुज़र रही थी. आज से समय बदला,हमारे मन का उल्लास भी करवट लेकर उठ बैठा. सुबह सुबह आबिदा को सुन रहा हूँ. एक ही गीत 'छाप तिलक सब ''' तीसरी बार सुन रहा हूँ. ये गीत मुझे एक ही बैठक में भी हर बार विलग सुनाई पढ़ रहा है. मुझे तो कई बार ये सूफी संगीत व्यायाम की शक्ल में लग रहा है.............मगर ये संगीत भी उम्र के साथ साथ अलग अर्थ देता है......गज़ब की कलम  हैं.

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