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27 अक्तूबर, 2020

माणिक को मिली पीएचडी की उपाधि


माणिक को मिली पीएचडी की उपाधि

प्रेस विज्ञाप्ति

उदयपुर/चित्तौड़गढ़/छोटी सादड़ी

20 अक्टूबर 2020 । मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के हिंदी विभाग के शोधार्थी माणिक की चौदह अक्टूबर को विद्या वाचस्पति की उपाधि हेतु मौखिकी सम्पन्न हुई। 'हिंदी की दलित आत्मकथाओं में चित्रित सामाजिक मूल्य' विषय पर बीते साढ़े चार साल से शोध कर रहे माणिक ने यह कार्य विश्वविद्यालय में ही असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजकुमार व्यास के निर्देशन में पूरा किया। निम्बाहेड़ा तहसील के अरनोदा गाँव से पीएचडी करने वाले संभवतया पहले व्यक्ति माणिक वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बसेड़ा छोटी सादड़ी में कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं। आठ दलित आत्मकथाकारों की तेरह पुस्तकों को आधार बनाकर किए गए अपने शोध में निष्कर्ष सामने आया कि देश में सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी व्याप्त है। 


वंचितों के उत्पीड़न वाले विवरण भरे पड़े हैं
। गौतम बुद्ध से लेकर अम्बेडकरवादी चेतना तक की यात्रा से बीते चार दशक में भरपूर मात्रा में दलित साहित्य लिखा और पढ़ा गया है। दलित वर्ग के कई कमज़ोर पक्ष भी शोध में सामने आए हैं जिनमें आंतरिक जातिवाद, धार्मिक अंधविश्वास, लैंगिक भेदभाव, अशिक्षा, आडम्बर सहित कई सामाजिक कुरीतियाँ शामिल हैं। बसेड़ा के हिंदी वाले माड़साब माणिक ने अपनी रुचि केन्द्रित इस शोध में दलित धर्म, दलितों की राजनीतिक हिस्सेदारी, साहित्यिक मठाधीशी, दलित इतिहास, सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष, दलित स्त्रीवाद जैसे कई संप्रत्यय पर गहराई से काम किया है। बीते दो दशक में समाज में काफी बदलाव आया है मगर अभी तक शोध में शामिल आत्मकथाओं में चित्रित समाज बीसवीं शताब्दी तक ही सिमित रहा है। संस्कृतिकर्मी माणिक की इस उपलब्धि पर अपनी माटी, स्पिक मैके सहित बसेड़ा के विद्यार्थियों में खुशी है

जितेन्द्र यादव
सम्पादक अपनी माटी

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