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18 मई, 2010
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( व्यंग्य )आदमी की जात अब समझदार हो गई है

  शेयर    आदमी की जात अब  समझदार हो गई है, खाने-पीने की पार्टी हो तो किसे बुलाना है,बड़ा चुनचुन कर बुलाते है ये लोग .जिनसे आने वाले महीने...

29 अप्रैल, 2010
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मुझे भी साहित्यकार बनना है.....

Share आजकल सभी तरफ छपने छपाने का जो दौर चल पडा है,कई बार दिल इतना क्रोधित होता है कि,कुछ कर नहीं पाने पर बस सिर फोड़ने की इच्छा होती है.दे...

 
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