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16 जुलाई, 2013

16-07-2013

हम एक ऐसेदौर मेंजी रहेहैं जहांविभिन्न ललितकलाओं कोपेशे केतौर परअपनाना औरउसमें अपनीज़मीन तलाशतेहुए करिअरबनाना कमजोखिमभरा नहींहै।अमूमन घरानेके युवाओंऔर परिवारजनको हीआगे बढ़नेके समुचितअवसर मिलतेदेखे गएहैं। गैर-कलावादी परिवारोंके नवोदितसाथियों केलिए रास्तेइतने आसाननहीं है।रियाज़-तपस्या केसाथ हीअपने सफ़रमें नेटवर्किंगऔर मेनेजमेंटका ज़मानाहै।कोई अपनेआपको इसदौर केहिसाब सेढ़ाल  के चले तो ही ठहरावहो पाताहै।बाकी आपजानते हैंकि कईमित्र मुम्बईकी ख़ाकछानने केबाद फिरसे अपनेगँवई परिवेशमें लौटतेदेखे हीजाते हैं।येसमय बड़ामारकाट हैफिर भीएक बातके प्रतितो आशान्वितहुआ हीजा सकताहै किमेहनती औरतपस्वी युवाओंके लिएआगे कीप्रगति हेतुकुछ ज़मीनहमेशा सुरक्षितहोती हीहै।ठेठ कस्बोंसे निकलकलाकार अपनेपेट कीख़ातिर मुम्बई-दिल्ली-पुणेकी तरफहो चलेहैं।ये मामलाआज सेही नहींसालों सेचला रहा है।

इसी समय कीउपज केरूप मेंहम यहाँएक परिश्रमजीवीयुवा साथीमुकेश शर्माकी चर्चा ज़रूरी हैं। वैसेमुकेश जैसेयुवा केमुरीद लगातारबढ़ने केपूरे चांसहैं इसबात काख़ास आधारइस युवाचित्रकार कासादा व्यवहारऔर योग्यताही  है। चित्तौड़गढ़,राजस्थान के बेगूंक़स्बे मेंछोटे सेगाँव पाछुन्दासे निकलाये दोस्तमुंबई मेंरहकर अपनेमुकाम कीतरफ बढ़रहा है।शुरुआतीपढ़ाई-लिखाईके बादमुकेश नेचित्रकारी की विधिवत शिक्षा ली।कई बारऐसा भीहुआ मुकेशको इसकला केजुड़े कईबड़े गुरुओंसे सीखनेका भीमौक़ा मिलतारहा। स्पिकमैके जैसेछात्र आन्दोलनकी गुरुकुलछात्रवृति योजना हो या फिरइसी आन्दोलनके राष्ट्रीयअधिवेशन हों।मुकेश नेसदैव अवसरोंको ठीकसे साधाहै।काम मेंतल्लीनता इसमित्र खासियतहै।

एक आदमी अगरअपने सफ़रमें येबात नहींभूले किउसकी ज़मीनकहाँ याजड़े कहाँहै तोउसकी प्रगतिमें बहुतसहूलियत होजाती है।यही सचमुकेश केसाथ भीहै। उसेअपने आगाज़और अंजामका पूराआभास है।ये ऐसाकलाकार हैजिसे अपनीपरम्परागत चित्र शैलियों के आभासके साथही मॉडर्नआर्ट काभी महत्वमालुम है।मुम्बई मेंरहकर भीये आदमीअपने गाँवके हालातऔर धूलको भूलतानहीं है।हालांकि उसकीप्रगति केलिए मुम्बईज़रूरी हैमगर मेरामानना हैकि यथासमयअपने कस्बाईइलाके मेंउसके फेरेभी कुछकम ज़रूरीनहीं है।उसका यहाँआना कबयहाँ केही किसीदूसरे युवाके लिएप्रेरणा कापुंज साबितजाए पतानहीं। हमारीतमाम शुभकामनाएंइस मित्रके साथहै। कईबड़े समारोहऔर आयोजनोंमें अपनेकृतियों केप्रदर्शन करकेमुकेश अपनेरास्ते परलगातार बनाहुआ है। 


आपको बताना ज़रूरीहै किसन दोहजार आठसे हीराजस्थान केसभी संभागीयमुख्यालयों सहित मुकेश गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेशमें अपनेसमूह औरएकल शोकर चुकाहै। इतिहासऔर पेंटिंगका विद्यार्थीमुकेश यदा-कदा विभिन्नसामाजिक संस्थाओंके केम्पके ज़रियेइसी कलाको नि:स्वार्थ भावसे दूसरोंको भीसीखा रहाहैं। गौरतलबहै किमुकेश मुम्बईकी भविष्यमें भीकई गैलेरियांमें शोकरने कीयोजनाएं है।योजनाएं मुकामतक पहुंचे, ऐसी शुभकामनाएंहै।

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