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28 फ़रवरी, 2015

जेंडर संवेदनशीलता पर कार्यशाला:एक अनुभव

प्रेस विज्ञप्ति
चित्तौड़गढ़,27 फरवरी, 2015

लैंगिक संवेदशनीलता आज की सबसे बड़ी जरूरत: जिला कलेक्टर वेदप्रकाश

हमारे इस परिवेश की सार्थकता इसी बात में है कि स्त्री और पुरूष के समन्वय से संचालित हमारे जीवन का संतुलन बना रहे। हमारे संस्कारों की शिक्षा में लैंगिक भेदभाव की सभी गलतियों को दुरस्त की जानी चाहिए। यहां देखी फिल्मों में देश दुनिया में स्त्रियों के प्रति हो रहे अत्याचार का बड़ा मार्मिक पक्ष है। हमारी मानवीयता लगातार क्षरित होती जा रही है ऐसे में हमारी सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

यह विचार महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिला सुरक्षा एवं लैंगिक संवेदनशीलता विषयक एक दिवसीय कार्यशाला में जिला कलेक्टर वेदप्रकाश ने व्यक्त कहे। शुक्रवार को ऋतुराज वाटिका में आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला प्रमुख श्रीमती लीला जाट ने भी बाल विवाह और उसकी पृष्ठभूमि पर उद्बोधन दिया। बाल विवाह के बाद असमय की संतानोत्पति की प्रक्रिया और स्त्री जीवन में कई मुसीबते पैदा हो जाती है। हमें पर्याप्त जागरूक होने की जरूरत है।

कार्यशाला की शुरूआत में संकल्प संस्था आकोला के सचिव और अधिवक्ता लक्ष्मीलाल जाट ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। बतौर प्रशिक्षक विकास अग्रवाल और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, सुनील कुमार झा ने विषय पर पॉवर पाइंट प्रदर्शन और डॉक्यूमेन्ट्री के सहयोग से अपनी बात कही। ‘वामा’, और ‘उसका आना’ जैसी डॉक्यूमेन्ट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षक माणिक ने हिन्दी साहित्य और सिनेमा में आए स्त्री विमर्श के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। 

कार्यशाला को महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक श्रीमती अजीता शर्मा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे परिवारों में बच्चों के पालन पोषण ने दिखाई देने वाले भेदभाव से लैंगिक संवेदनशीलता प्रभावित होती रही है। कई मामलों में औरते खुद भी स्त्री अधिकारों के प्रतीक इतनी जागरूक नहीं होती और महिला उत्पीड़न के मामले बढ़ाने में उन्हीं का हाथ साबित हुआ है। श्रीमती शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी अहम् भूमिका निभाने वाले आंगनवाड़ी केन्द्र के मार्फत खुली चर्चाएं करने की वकालत की। दोपहर के बाद वाले सत्रों में मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट मधुसूदन शर्मा और ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी धर्मराज मीणा ने प्रतिभागियों को सम्बोधित किया।

कार्यशाला के इस मौके पर महिला सुरक्षा सलाहकार केन्द्र की सुमन टेलर और सुमित्रा साहु ने केन्द्र की गतिविधियों पर विस्तार से अपने अनुभव सुनाएं। पुलिस उप अधीक्षक कानसिंह भाटी ने कहा कि इस देश में तमाम तरह के कानून और उनकी पालना होने के बावजूद कहीं न कहीं पारिवारिक रिश्तों में संवेदनाओं का लगातार छीजते जाना चिन्ता का विषय है। कार्यशाला का संचालन कार्यक्रम अधिकारी अनिरूद्ध और बाल विकास परियोजना विकास अधिकारी बंटी बालोठिया ने किया। कार्यशाला में लगभग 50 प्रचेताओं एवं महिला पर्यवेक्षकों ने भाग लिया।
अनिरूद्ध
कार्यक्रम अधिकारी,महिला एवं बाल विकास विभाग,चित्तौड़गढ़




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