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18 मई, 2017

शुक्रिया उमर भाई।

नमस्कार,
आजकल ज़िला सार्वजनिक पुस्तकालय चित्तौड़गढ़ में रोज़ाना जाना हो रहा है।मुख्य लाइब्रेरी में तो भौतिक सत्यापन जारी है। मगर उन्होंने ने एक कमरा हमारे लिए फिलहाल खोल दिया है।पढ़ने विचारने के लिहाज से बहुत सुकूनदायक जगह है।लोग कम ही आते हैं, इक्का दुक्का। पंखे हैं।कुर्सियां लोहे वाली और अनकम्फर्टेबल है तो नींद का सवाल ही नहीं।रीड की हड्डी सीधी रहती है।डेढ़ दर्जन पत्रिकाएं और आधा दर्जन समाचार पत्र आते हैं।पानी की मटकी बीते साल वाली ही है।ठंडा पानी ही पीना हो तो वहां के भरोसे मत आना। पुस्तकालय अध्यक्ष बड़ा भला है। आंगन एकदम उजाड़ है।एक भी पेड़ हरा नहीं है। दोष किसे दें पतझड़ को या माली को। खैर।मगर है शहर के एकदम अधबीच।आते जाते या सब्जी भाजी लेने जाते वक़्त यहाँ कुछ देर ठिठक सकते हैं।समय सुबह ग्यारह से वही शाम 6 बजे तक।मंगलवार को दूकान बंद रहती है।आज इंडिया टुडे में नक्सलवादी समस्या पर एक ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ी।

कभी टहलते हुए आइएगा।मुलाक़ात करेंगे।पढ़ने की इस संस्कृति को बचाने और बढ़ाने की ज़रूरत है।आएं और इस स्पेस को सुन्दर बनाएं।आप आएँगे तो प्रशासन को लगेगा कि शहर के लोगों को पुस्तकालय की भी आदत है।आज आते समय चित्तौड़गढ़ रोडवेज बस स्टैंड वाली बुक स्टॉल से अनुष्का के लिए बाल पुस्तकों की पहली खुराक खरीद लाया।बाकी अब तक बाल मन केंद्रित पुस्तकें हमारे मोहम्मद उमर भाई देते रहे थे,अब वे राजसमंद चले गए।अलग अलग पढ़ने की लत लगा गए।क्या करें।भोग रहे हैं।

शुक्रिया उमर भाई।
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चित्तौड़गढ़ निवासी और देश के प्रसिद्द हिंदी गीतकार रमेश शर्मा जी से एक प्रतिष्ठित पत्रिका के लिए इंटरव्यू करने का मौक़ा मिला.बहुत सहज ढंग से बातचीत हुई.ऐसा बिरला और सहज-सरल इंसान चित्तौड़ का वासी है और इतनी लोकप्रियता के बावजूद उनके भीतर रत्तीभर भी घमंड नहीं है.यह अनुभूति अचरज पैदा करती है.यह हमारे लिए गौरव का विषय भी है.बातचीत जैसे ही प्रकाशित होगी आपके बीच साझा करूंगा.
इंटरव्यू बीस एमबी का हो गया है.पत्रिका के छपने बाद आपके साथ ऑडियो साझा करने की कोशिश रहेगी.बड़े दिनों बाद इंटरव्यू किया.उनकी बाते सुनने के बाद ऊर्जा से भर गया हूँ.आने वाले एक महीने में कुछ और सार्थक इंटरव्यू आपके सामने लाने का प्रयास करूंगा.मंच की कमी नहीं है.संभावनाओं के बीच जीता हूँ.बस कुछ सार्थक करके जीना मेरा मकसद है.

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