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06 मार्च, 2012

06-03-2012

आज ही सेकण्ड ग्रेड परीक्षा का परिणाम आया.चयन नहीं होना थोड़ा सा दर्दनाक  रहा. पहले से कायम सरकारी नौकरी ने ऐसे दुःख  में सहारा दिया.दोस्त दिलासा देते रहे.सभी काम के आदमी ऐसे समय में याद आए.जल्दी ही अठारह अप्रेल को आयोज्य परीक्षा पास है जब सेकंडरी एच.एम्. की एक परीक्षा होनी है.दूजी एक परीक्षा सेकण्ड ग्रेड की जुलाई में माथे पर है.शायद फिर से हमें जुटना होगा.ये दूजे शौख फिर से कुछ समय के लिए ताले में बंद हो जाएँगे.दिल धड़क रहा है,इधर धीरे धीरे पूरा घर नोर्मल हो रहा है.आशाजनक परिणाम की आशा में पत्नी को नोर्मल होने में मेरे से कुछ ज्यादा समय लगा.बेटी तो इस तरह के अनुभव और इनके असर के लिए अभी पर्याप्त बड़ी नहीं हुई है.

आज ही डाक से हमारे कोटा के वरिष्ठ मित्र वीरेंद्र सिंह गोधारा जी ने हमें तीन किताबें गिफ्ट के रूप भेजी है.रमणिका गुप्ता के निबंध-साम्प्रदायिकता के बदलते चहरे(वाणी प्रकाशन),जाने माने लेखक विष्णु नागर के निबंध-भारत एक बाज़ार है(राजकमल प्रकाशन), ये दोनों मेरी रूचि के अनुकूल निकले.तीसरा और नितांत संस्कृत से जुड़ा गिफ्ट कृष्णदास अकादेमी,वाराणसी से प्रकाशित-केलिकुतूहलम भेजा है.जो मेरी रूचि का तो नहीं है मगर मरे किसी मित्र को ही देने के काम तो ही जाएगा.गोधारा जी मरा बहुत ख्याल रखते हैं कुछ दिन पहले ही अतुल कनक जी का लिखा उपन्यास -जूण जातरा भेजा था.मुझे लगता है मैं प्रो.काशीनाथ जी के लिखे रेहान पर रग्घू के बाद शायद विष्णु नागर जी को ही पढू.मगर इस सेकण्ड ग्रेड के परिणाम के आने से शायद सब प्लान फेल हो जाए.

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