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20 मई, 2012

20-05-2012


अचानक मिले एकदोस्त केसाथ तीन घंटेका साथ,तमाम चर्चाएँ,हंसी-ठठे,कविता,अनुभव,अतीत बोधकी बातें।शहरके एकस्कूल सेन्ट्रलअकादेमी मेंप्रिंसिपल अश्रलेश दशोरा जिनके साथमैंने सनदो हज़ारसे दोहज़ार दोतक विद्याविहार स्कूलमें अध्यापकीकी।मेरे कलासंकाय सेथा।वे विज्ञानसे आतेथे।आम धारणाके मुताबिक़कला काअध्यापक बनामैं जिससेमेरा मेहनतानाकुछ कमथा।बीते दिनकी बातेंएक एककर लीरतेहुए यादकी।घर परिवारसे अलगलेकर दुनियादारीतक।इंटरनेट से लेकर शिक्षा जगततक।समय केसाथ बदलावके इसदौर मेंहिचकोले खातेआज केयुवाओं केबारे मेंभी तमामबातें हुयी।नामचीनलोगों केसमूहीकरण कीआदतों औरफिर यथासमयउसके निजीउपयोग केहथकन्डो  पर भी हमने चुटकियाँ ली।बालबच्चेदार हमदोनों साथियोंने बचपनऔर स्कूलजैसे पहचानेविषय परकई सारेनिष्कर्ष निकाले।

आखिर में अपनीताज़ा कवितासुनाई।पुराने मित्र के साथ अचानकमिले इतनेसमय सेबिखालाए हमदोनों देरतक  हँसते रहे।गंभीर विषयों के साथकई हलकेफुल्के विषयभी हमारेलपेटे मेंआये।आज तबबहुत अच्छालगा जब  मित्रकई बारअपने अभिन्नके हालके अपडेटके प्रतिकितना रूचिके साथसुन रहाथा।मन खिलखिलाजाता हैजब कोईमन केदुखड़े-सुखड़ेइत्मीनान सेसुनता है।हमविचार केसाथ देरका सफ़रभी चुटकियोंभरा लगताहै।अजीब बातये भीहै किऐसे हमविचारढूँढना सालोंसे लापतालोगों कोढूँढना केबराबर है।

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