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12 मई, 2017

'हंस' और 'नया ज्ञानोदय'

नमस्कार
'हंस' और 'नया ज्ञानोदय' की बात कर रहा हूँ.ये दोनों पत्रिकाएँ पहले डाक से रेगुलर घर आती थी.फिर सदस्यता शुल्क ख़त्म हो गया तो बंद हो गयी.बीच में छूट सी गयी.बीते दिनों अजमेर जाते वक़्त चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर बुक स्टॉल पर अग्रवाल जी मिले.'हंस' खरीदी.पूछा तो बातों में पता चला चित्तौड़ जैसे छोटे शहर में 'हंस' और 'नया ज्ञानोदय' की पांच से दस प्रतियांं वे मंगवाते हैं.ग्राहक को वाट्स एप से सूचना दे देते हैं.पत्रिका अमूमन बारह तारीख के आसपास आ जाती है.दोनों अच्छी पत्रिकाएँ हैं.पत्रिकाओं की इतनी कम मांग से आप शहर के छोटेपन का अंदाज़ लगा सकते हैं.हमें साहित्य के पाठक बढ़ाने चाहिए.एक मुहीम के तहत ही सही.

कुछ सार्थक और गंभीर पढ़ेंगे तो अपनों के बीच अलग पहचान बना पाएंगे.बाकी अख़बार पढ़ लेना ही पढ़ा लिखा होने की या खासकर अध्यापक होने का अंतिम दायित्व मान लेने वालों के साथ मेरी सहानुभूति है.हाँ अग्रवाल जी का नंबर दे रहा हूँ उनसे संपर्क करके अपना नंबर दे दें, वे पत्रिका के आने की सूचना आपको दे देंगे.उनका नंबर 9414497911है.

हमारे कई साथी कहा करते रहे हैं कि जिन घरों में एक ज़माने में हिंदी की गंभीर पत्र-पत्रिकाएँ आती थी उन्हें सभ्य घर माना जाता था.अब घर में इस तरह के रिवाज़ का सत्यानाश हो चुका है.क्या हम फिर से पढ़ने और गुनने की रवायत लौटा पाएंगे.क्या हम फिर से कम से कम एक या दो साहित्यिक पत्रिकाएँ घर लाने की एक नयी इच्छा पाल सकते हैं ?सोचिएगा. आप महीनेभर में गैर अकादमिक साहित्य सामग्री के नाम पर पढ़ने के लिहाज से कितना खर्च करते हैं? या कुछ भी खर्च नहीं करके केवल कोर्स की किताबें पढकर नौकरी पर चले जाते हैं.क्यों स्कूलों में पढ़ रही युवा पीढ़ी का सत्यानाश कर रहे हैं.विद्यार्थी आपसे कोर्स के अलावा भी बहुत आस करते हैं.बाकी पास होने के लिए बाज़ार ने उन्हें कुंजियाँ,पासबुकें और वन वीक सिरिजें दे रखीं हैं.चेत जाओ वरना बच्चे समझ गए कि गुरूजी के झोले में कुछ नहीं है तो वे स्कूल छोड़ देंगे और आप देखते रह जाएंगे.


आदर सहित माणिक
सन 2000 से अध्यापकी। 2002 से स्पिक मैके आन्दोलन में सक्रीय स्वयंसेवा। 2006 से 2017 तक ऑल इंडिया रेडियो,चित्तौड़गढ़ से अनौपचारिक जुड़ाव। 2009 में साहित्य और संस्कृति की ई-पत्रिका अपनी माटी की स्थापना। 2014 में 'चित्तौड़गढ़ फ़िल्म सोसायटी' की शुरुआत। 2014 में चित्तौड़गढ़ आर्ट फेस्टिवल की शुरुआत। चित्तौड़गढ़ में 'आरोहण' नामक समूह के मार्फ़त साहित्यिक-सामजिक गतिविधियों का आयोजन। कई राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सवों में प्रतिभागिता। अध्यापन के तौर पर हिंदी और इतिहास में स्नातकोत्तर। 'हिंदी दलित आत्मकथाओं में चित्रित सामाजिक मूल्य' विषय पर मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से शोधरत। प्रकाशन: मधुमती, मंतव्यकृति ओर, परिकथा, वंचित जनता, कौशिकी, संवदीया, रेतपथ और उम्मीद पत्रिका सहित विधान केसरी जैसे पत्र  में कविताएँ प्रकाशित। कई आलेख छिटपुट जगह प्रकाशित।माणिकनामा के नाम से ब्लॉग लेखन। अब तक कोई किताब नहीं। सम्पर्क-चित्तौड़गढ़-312001, राजस्थान। मो-09460711896, ई-मेल manik@apnimaati.com

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