एक शाम अगड़ी जातियों के दो शिक्षित मित्रों से मुलाक़ात हुयी बातों ही बातों में हम जाति, दलित विमर्श और ओमप्रकाश वाल्मीकि जैसे विचारोत्तेजक मुद...
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पिताजी का मकान ------------ छूट्टी के बाद का बचपन बीत गया खेतों की मेढ़ पर दिशाहीन हो डोलते फिरने में कहाँ दिन गु...