इन दिनों की व्यस्तता के बीच कोई भी कविता नहीं उपजी.बहिन के कल लड़की हुई.बेटी के अठारह से परीक्षाएं हैं.मित्रों से शहर में मिलना भी लगातार टलत...
इन दिनों की व्यस्तता के बीच कोई भी कविता नहीं उपजी.बहिन के कल लड़की हुई.बेटी के अठारह से परीक्षाएं हैं.मित्रों से शहर में मिलना भी लगातार टलत...
शहर में एक कवि संगोष्ठी में जाना हुआ.मैंने विविधताभरे कवि देखे.कुछेक कवि होने भ्रम में बुढा गए हैं.कुछ सिलेबस की किताबों से कविता बांच कर चल...
शहर में खुद के लिए साहित्यिक-रिचार्ज लेने हेतु कई दोस्त हैं आज शाम एक घंटा राजेश चौधरी जी के यहाँ से रिचार्ज करवाया.राही मासूम रज़ा साहेब का ...
चित्रांकन-अमित कल्ला,जयपुर डिनर पार्टी इतनी फ़ैली हुयी थी कि पहचान के लोग मिले और अपनों को ढूंढें बगैर खा-पी के लौट गए पहनी हुयी चूड़ियां खोल...
कुछ चंट खोपड़ियों को अलग रख दें तो हरेक आदमी मुझे सीधा और सरल ही क्यों लगता है.खोट मेरे विचारने के सीधेपन में हैं या जगत अब एक सीध में चलने ल...
सुबह का निकला अपने गांव 'अरनोदा' होकर लौटा हूँ।माँ-पिताजी के साथ। आते-जाते रास्ते में अपने देखे में मैंने बहुत सारी कवितायेँ मुख ज़बा...
झारखंडी जनगीत सुन रहा हूँ ,प्रादेशिक भाषाओं के संपर्क में आने पर उनकी चर्चा कर कहना चाहता हूँ कि जिन शब्दों का अर्थ लगाने में बड़ी दिक्कत हो...