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25 मार्च, 2018
कविता:अभी ज़िंदा हूँ कुछ दिन

कविता:अभी ज़िंदा हूँ कुछ दिन

रविवार, मार्च 25, 2018

अभी ज़िंदा हूँ कुछ दिन   ---------- सभी बोल रहे हैं   सभी छप रहे हैं   लिख रहे हैं सभी आजकल   चारों तरफ आवाजें हैं   बोल...

13 अगस्त, 2014
'शोध दिशा' के फेसबुक कविता विशेषांक में छपी कवितायेँ

'शोध दिशा' के फेसबुक कविता विशेषांक में छपी कवितायेँ

बुधवार, अगस्त 13, 2014

आदिवासी ये सातवें दिन के हाट भी गज़ब हैं हाँ इकलौते बड़े ज़रिये हैं मिलने-मिलाने गीत गाते दुःख बिसराने के रोचक साधन हैं खिलखि...

05 जनवरी, 2014
05-01-2014

05-01-2014

रविवार, जनवरी 05, 2014

कविता, कवि ह्रदय आदमी के ज़िंदा होने का प्रमाण है जिसमें वह अपने होने के सबूत के साथ जीवन के अनुभवों को बारीकी से देखते हुए समाज के मद्देनज़र ...

17 अगस्त, 2013
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17-08-2013

शनिवार, अगस्त 17, 2013

कई हाथों में इस बार  होक वाली चांदी या भोडर की राखियाँ बंधी दिखेगी तुम्हे रुँधे गले से रोएँगे  बहुत से जवान अंगोछे से पौंछकर आँसू बार-बार लौ...

 
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