'बारिश' विषयक क्षणिकाएं (1) अष्टमी पूरी रात चित्तौड़ अकेला भीगता रहा लगातार घिरा रहा भारी बारिश से ...
'बारिश' विषयक क्षणिकाएं (1) अष्टमी पूरी रात चित्तौड़ अकेला भीगता रहा लगातार घिरा रहा भारी बारिश से ...
' वक़्त ' शीर्षक से क्षणिकाएं (1) आयेगा वक़्त मेरे मन का सोचते हुए गुज़र गया एक पूरा दौर पीछे छूट गया कहीं गलती से अ...
'प्रेम' विषयक क्षणिकाएं (1) दिखी मिली चहकी बहकी झुकी रुकी आखिर चल दी हाथों में धर के प्रेम शबद (2) उसके इतराने का...
( ''अदाएं'' शीर्षक की क्षणिकाएं) (1) तुम अच्छी लगती हो बातों के बीच इशारे करती अपनी दोनों आँखों सहित पसंद आती...
( 'पत्नी' सिरीज़ की कुछ क्षणिकाएं ) (1) मैं थक हार के भी नहीं बन सकता था उसके मानिंद सामर्थ्य कहाँ था मुझमें इस हद तक खु...
प्यार में इन दिनों (1) प्यार में इन दिनों एकाध दिन छोड़ कर याद आ ही जाती है पहली मुलाक़ात एतबार से उबकती हुई नज़रें लबालब मुझ प...
प्यार (1) भरपूर मेहनत के बाद भी वो खफा ही रही आखिर तक मनाने में लगे रहे जिसे सुबह से शाम आखिर बीत गयी खाली आज की दुपहरी भी इसी ...