न पूछा किसी ने बिछोने का न ओढ़ाने की सोची किसी ने आज जब ठिठुरा किला पूरा शहर में रातभर पिछले दिनों की मावठ का अस...
न पूछा किसी ने बिछोने का न ओढ़ाने की सोची किसी ने आज जब ठिठुरा किला पूरा शहर में रातभर पिछले दिनों की मावठ का अस...
खस्ताहाल महल देख तुम चकित न होना पलभर सारी यादें ताज़ा करते यहीं ठिकाने भामाशाह के आँख फाड़ फाड़ क्या हो देखते जो बिखरा है वही सचाई न...
न होकम रहे न दाता अब रखवाला कौन बदल गया है बहुत कुछ इधर बरसों में आया झांकने आज मौसम तक रुख बदलता आकर यहाँ हवा भी ठहरती है थोड़ा दिनभर ...
एक पुरानी बस्ती भी है मेरे शहर के किले में लोग रहते है,मिलते है खाते है,कमाते हैं घरों में भरे हैं बूढ़े,ज़वान औए बच्चे चलती है ज्य़ाद...
अतिथि को दिखाने के काम आता था किला हमारे शहर का विचार नकली था मगर बरसों बना रहा अटल पुरखों से हमारे घर में कभी कभार बन ...